अभाव से भाव जात
भाव से जात भव,
भवसागर अपार होतो
पार न पावे सब…
भाव में आभाव से
रंजित हो स्व-भाव,
स्वा-भाव ज्ञान अज्ञान में
पुलकित हो भव…
~मुकुंद देव (२८-०९-2२०१९, प्रातः ७:४१)
Dhrupad, Music, Poetry, Prose, Article…
अभाव से भाव जात
भाव से जात भव,
भवसागर अपार होतो
पार न पावे सब…
भाव में आभाव से
रंजित हो स्व-भाव,
स्वा-भाव ज्ञान अज्ञान में
पुलकित हो भव…
~मुकुंद देव (२८-०९-2२०१९, प्रातः ७:४१)