चित्त में जोत जलाओ
अब ना देर होई,
जोत जले मानो
तब ही भोर भई….
तुझमें केबल तू बसा है
और ना दूजा कोई,
मन दर्पण कर ले साफ
सुख-दुख कछु नहीं…..
जीवन धारा बढ़ चला है
राह कोई ना दिखाई,
अपने पथ आपन देखो
संगत कोई नही…..
अमर विष पीइ ना आया
भव धरा में कोई,
मृत्युंजय जप जितना चाहे
मरन निकट होई….
#मुकुन्द_देव #जीवन_धारा