स्थाई:
सेज बिछाऊ फूलेवन में
पी के दरस लागी,
पी गयो कबसो ना आयो
दीन रात हूं जागी ।।
अंतरा:
तड़प तड़प जोबन जात है
नैनन में नीर ,नित बहत
रुठो ना मोसो अनुरागी ।।
२२/१०/२०१८
Dhrupad, Music, Poetry, Prose, Article…
स्थाई:
सेज बिछाऊ फूलेवन में
पी के दरस लागी,
पी गयो कबसो ना आयो
दीन रात हूं जागी ।।
अंतरा:
तड़प तड़प जोबन जात है
नैनन में नीर ,नित बहत
रुठो ना मोसो अनुरागी ।।
२२/१०/२०१८