बाबूजी के आखरी वक़्त

उस अनन्त यात्रा के आखरी वक़्त पर मुझे उनके चरण सेवा का अवसर मिला। उनके पद स्पर्श करते ही उनकी ऊर्जा का किंचित आभास हुआ और उनकी आँखें जब मुझ पर पड़ी सर हिलाते हुए कुछ इशारा कर रहें थे, शायद हर बार की तरह जीवन दर्शन के तत्व समझाना चाहते थे। जिन तत्वों के कारण मुझमें परिवर्तन का एक सुधारा बह रहा हैं। जिन तत्वों को समझना और समझाना सबके बस की बात नहीं उन तत्वों को बाबूजी बखुबी समझा देते थे। कुछ देर तक मैं उनके पैरों के पॉइंट्स दबाते रहा हर बार की तरह उनसे प्रतिक्रिया की उपेक्षा थी मुझे पर उनके मौन रहना मेरा हृदय में क्रन्दन की भावनाओं को जागृत कर रहा था। करीब 15 से 20 मिनिट तक मैं उनको स्पर्श करता रहा उनकी साँस लेने की तकलीफ को देख पॉइंट्स दवाना बंद कर दिया। परिवार के हर एक सदस्य के चेहरे पर उदासीनता और आँखों से आंसुओं की गंगा बह रही थी, सबके मुखसे क्षमा याचना के सुर गूंज रहे थे और बाबूजी आशीर्वाद की धारा बहा कर अनंत यात्रा के लिए चल बसे।

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