राग गावति

मोरे अवगुण ना धरो गुण के ज्ञानी
मैं अज्ञानी सुरताल कछु न जानि ….।

गुन के मुरत गुरुमुख सूरत
दया करो मोपे तुम हो महाज्ञानी….।।

गुरुकृपा
०५/११/२०१८
~मुकुन्द देव
http://www.mukunddev.com

Leave a comment