सुन फिर सुनना

सुन फिर सुनना
ये हे जिंदिगी, नही है खिलौना
जो मैंने देखा
और सुना भी
वो नही है जमाना।।

सुन फिर……

किसने पैदा किया है
कैसे सब हुआ है
अनसुलझी गुट्टी है
इसमें न उलझना
सुन फिर…।।

१५/१०/२०१९
मुकुंद देव

http://www.mukunddev.com

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