स्वर में जब समायो

बेजान में जान आयो
सुरों से जब रमायो
आलाप न तान
एक में सब समायो।।

इच्छा अनिच्छा
कछु न आई,
अहम् नाद
स्वहम् गायो,
अनंत नादे
निरन्त आयो।।
~मुकुंद देव २२/०८/२०१९

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