
यह तो होना ही था,
कितने दिन छुपोगे
भाग कर भी कहाँ जाओगे
प्रकृति के प्रकोप से
आधुनिक विज्ञान का
लाचार, बेबस, उदासीनता को
महसूस करना ही था
यह तो एक दिन होना ही था….।।
यह तो होना ही था,
तुम्हारे बुरे कर्मों का
पिछले जन्मों का नही
बीते हुए कल का,
अर्थ के पीछे निर्रथकता का,
मानव होकर मानवता से अंजान
विज्ञान के अहंकार से स्वयं को महान,
आज उसी विज्ञान से
विनाश का तांडव देखना ही था,
यह तो एक दिन होना ही था..।।
यह तो होना ही था,
तुमने प्रकृति से सबकुछ लिया
ले ले कर स्वार्थी प्रमाण दिया,
तुमने जो दिया
प्रकृति को लौटाना हीं था
यह तो एक दिन होना था….।।
यह तो होना ही था,
दर दर से ठोकर खानी ही थी,
डर डर के जी ही रहे थे
अब डर को करीब से देखना ही था,
यह तो एक दिन होना ही था…
यह तो एक दिन होना ही था…।।
~मुकुंद देव