काया का दर्पण

बस एक कंपन ही है
इसीसे काया सम्पन ही है,
मन न करो, मन से करो
मन काया का दर्पण ही है।

काया पर किसीकी छाया है
कण कण में समाया है,
क्या है? क्यों है ? कहा है?
देखो!
क्यूं के, मन काया का दर्पण ही है।

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