सुर सागर

सुर-सागर की

लहरों से छलकती

बूंदों के

एक अनु-बिंदु के

छलकते ही

कभी धूप,

कभी पवन,

नहीं तो खुद सागर ही

निगल लेता है मुझे…।।

~ मुकुंददेव

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