क्या जवाब दूँ ?

मैं तो
बहती नदी के धार को
ढलते हुए सूरज के
बुझती हुई रौशनी को,
चार पैरो वाली
कंपकपाती बृद्धा को,
रोग में पीड़ित अछूतों को,
बहती पवन के स्पर्श को,
देख चुका हूँ करीब से ।।

खुद को साबित करने के लिए
क्या जवाब दूँ उस रौशनी को
जो ढल चुकी है,
उस हवाओं को
जो वह चुकी है,
वो नदी की धार
जो समुन्दर में
समां चुकी है..

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