बस चल रहा है -2

बस चल रहा है
जीवन की नॉका मैं
शारीर सबार है,
किनारे से निकले थे
किनारे की तलाश है,
बस चल रहा है…

सोचा था
सागर बहुत छोटा है,
वही तक फैला है
जहाँ बादल झुका है,
जितने भी करीब आऊ
वो बैसे दीखता है,
मेरे नज़र के साथ
ये कैसी धोखा है,
बस चल रहा है….

Leave a comment