चलो

चलो वहां चले
जहां से किरणे निकले,
न सुबह न शाम
प्रकृति की आंगन में
जो सदा जले ।।

न वस्तु हो,
न व्यक्ति हो,
राह अगर देख चुके हो,
चलते चलो फिर अकेले।।
चलो वहां चले…

~मुकुंद देव

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