है गुरूदेव ज्ञान के सागर

दास आज तुम किनारे पर,

बाट तकत हूं कब आवे देश

ज्ञान-भिक्षाथाल कर-धर-कर…।।

तुम बिन सुर अधर न आवे

राह न दिशत अंधार छावे,

एक एक दिन बरस लगत

सेवा दरसों को मन रिझावे…।।