ଦିନ ବିତି ଗଲା ରାତ୍ରି ଆଗମନେ
ଏବେବି ପଡୁଛ ମାନେ
ତୁମ ସଂଗେ ବିତା ସମୟକୁ ମୁଁ
ଦେଖୁଅଛି ଦିବା ସ୍ୱପ୍ନେ…..।।
ପଲକ ପଡୁନି ଝଲକ ତୁମେ
ପୁଲକିତ ମର୍ମେ ମର୍ମେ
ପ୍ରୀତି ନୟନରେ ପ୍ରେମର ଇଙ୍ଗିତ
ଦୃଶ୍ୟମାନ କୋଣେ କୋଣେ….।।
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ଦିନ ବିତି ଗଲା ରାତ୍ରି ଆଗମନେ
ଏବେବି ପଡୁଛ ମାନେ
ତୁମ ସଂଗେ ବିତା ସମୟକୁ ମୁଁ
ଦେଖୁଅଛି ଦିବା ସ୍ୱପ୍ନେ…..।।
ପଲକ ପଡୁନି ଝଲକ ତୁମେ
ପୁଲକିତ ମର୍ମେ ମର୍ମେ
ପ୍ରୀତି ନୟନରେ ପ୍ରେମର ଇଙ୍ଗିତ
ଦୃଶ୍ୟମାନ କୋଣେ କୋଣେ….।।
समय समय से बह
रहा है,
पर, आपके साथ बीता समय
ठहर गया है….।
न जाने किस डोर में बंधे हेैं
जो नहीं हैं वह दोहरा रहा हैं….।
समय समय से……!!
समय हैं पर मेैं नहीं हूँ
समय से दूर और कहीं हूँ…..।
वह समय भी समय ही था
जो अब भी मुझमें गुज़र रहा हैं…..।
समय समय……!!
१६/०९/२०१९
~मुकुंद देव
सुन फिर सुनना
ये हे जिंदिगी, नही है खिलौना
जो मैंने देखा
और सुना भी
वो नही है जमाना।।
सुन फिर……
किसने पैदा किया है
कैसे सब हुआ है
अनसुलझी गुट्टी है
इसमें न उलझना
सुन फिर…।।
१५/१०/२०१९
मुकुंद देव
कौन कहता है ?
वह मुझमें बसे हैं
इसलिए सब मुझपर हँसे है…।।
कौन कहता है ?
मेरे लिए वह कभी
बोहत रोये है,
और मेरे लिए
ना जगे ना सोये हैं…।।
कौन कहता है ?
मेैं उनमें और वह मुझेमें हैं
उनको मुझसे अटूट प्रेम हैं,
वह मेरे लिए जिए हैं
मेरी याद में पल पल मरे हैं,
यह कौन कहता है ?
किसी ने ठीक कहा है !
न वहाँ काया न कोई छाया हैं
हम सब किसी माया में डूबे हैं…।
न वह मुझमें न मेैं उनमें
पर किसीना किसी धुन में रमे है…।।
यह भी कौन कहता है ?
~मुकुंद देव (०८:४५ pm २८/०८/२०१९)
ଘାତ ପ୍ରତିଘାତ ଆଘାତ କୁ ସହି
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର ଅନନ୍ତ ରୁ ବହି,
ସ୍ଥିର ଆବରଣେ ଅସ୍ଥିର ସ୍ୱର ଏ
ଗତି ତାର ଧୀର ବହେ ରହି ରହି।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର……….।।
ସମ୍ବାଦ ମୋ ସଂଗେ ବିବାଦ କରଇ
ଅସ୍ଥିର ଲହରୀ ମନେ ମୋ ଖେଳାଇ,
ସ୍ଥିରତା ଆଜି ମୋ ମନର କଳ୍ପନା
ନାଦ ନିରନ୍ତତା ଖୋଜି ପାଉନାହିଁ।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର……… ।।
ଖୋଜି ଖୋଜି କେବେ ହଜି ଯାଉଅଛି
ନିଜ ମଧ୍ୟେ ନିଜେ ମଜ୍ଜି ଯାଉଅଛି,
ଅନନ୍ତ ନାଦର ଅନାଦି ସ୍ୱର ରେ
ଅନ୍ତର ଆତ୍ମା ମୋ ଭିଜି ଯାଉଅଛି।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର……..।।
କେବେ ଜ୍ୟୋତି ହୋଇ ମତି ହରାଉଛି
ଘନ ଅନ୍ଧାରରେ ଆଲୁଅ ସାଜିଛି,
ରଙ୍ଗ,ରୂପ,ଗନ୍ଧ ନଥାଇ କିଛି ବି
ଐଶର୍ୟ ଭାବେ ଯାଉଅଛି ଗାଇ।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର………।।
୨୪/୦୮/୨୦୧୯
ମୁକୁନ୍ଦ ଦେବ
କାଳର ରୂପ ଯେ ବିଶାଳ
କାଳ ନହିଲେ ସେ ଅକାଳ,
କାଳର କଳାରେ କଳାୟିତ ଯିଏ,
କାଳ ତା ପାଈଁ ସକାଳ।
କାଳ ପରି ମନ ଚଞ୍ଚଳ
ଦୁହିଁଙ୍କର ଗତି ପ୍ରବଳ
କାଳ ସଂଗେ ମନ ତାଳ ମେଳ ଥିଲେ
ଜୀବନ ହୋଇବ ନିଶ୍ଚଳ।
2:46PM 27/05/2019
काश ये दिन भी न आता।
परम पूज्य छोटे गुरूजी का जन्म भूमि महाकाल नगरी उज्जैन हैं, यहाँ से हीं मेरे पूज्य गुरुओं का संगीत का अनंत यात्रा शुरू हुआ। उस पवन भूमि को स्पर्श करना और उस मिट्टी को अपने देह से लगाकर मिट्टी बन जाना ही सौभाग्य है। पर जो मेरे अंदर सदैब जीवित है उनको याद किस तरह करूँ ? उनके याद में अपने गायन समर्पित कैसे करूँ ? शायद ये मेरे जीवन का सबसे कठिन पल होगा। प्रिय छोटे गुरूजी आप थे, हैं और सदा हीं रहेंगे कंठ और नाशिका के उस अग्रभाग में जहाँ स्वर के अंतिम बिंदु दीखता है, ह्रदय और नाभि के गुरुगर्जन हुदक, गमक, लहक, धुरण, मुरण, स्पर्श और कंपित स्वरों में, स्वरों के बीच श्रुतिओं के अन्तराल में, शब्दों से परे निशब्द में जहाँ न में हूँ न और कोई जहाँ सिर्फ और सिर्फ आप हीं आप हैं।
खुद को उन्होंने हम सब में समां दिया
वो तप में रमें थे
हम सब को जप में
रमा दिया ।
खुद को उन्होंने…….।।
बोहत कुछ उन्होंने देखा और लिखा भी
जाते समय पूर्णच्छेद नेही
कमा दे दिया,
खुद को उन्होंने….।।
सबने कुछ नेही बहुत कुछ खोया
उन्होंने बहुतों में
सब लुटा दिया ।
खुद को उन्होंने….।।
उन्होंने हमे रोशन किया
हम अँधेरे में थे
ज्ञानमय प्रदीप जलाया
ज्योत से ज्योत को जलना सिखाया।
खुद को उन्होंने…..।।
12:19pm 13/11/2019
मुकुंद देव
अभाव से भाव जात
भाव से जात भव,
भवसागर अपार होतो
पार न पावे सब…
भाव में आभाव से
रंजित हो स्व-भाव,
स्वा-भाव ज्ञान अज्ञान में
पुलकित हो भव…
~मुकुंद देव (२८-०९-2२०१९, प्रातः ७:४१)
उस अनन्त यात्रा के आखरी वक़्त पर मुझे उनके चरण सेवा का अवसर मिला। उनके पद स्पर्श करते ही उनकी ऊर्जा का किंचित आभास हुआ और उनकी आँखें जब मुझ पर पड़ी सर हिलाते हुए कुछ इशारा कर रहें थे, शायद हर बार की तरह जीवन दर्शन के तत्व समझाना चाहते थे। जिन तत्वों के कारण मुझमें परिवर्तन का एक सुधारा बह रहा हैं। जिन तत्वों को समझना और समझाना सबके बस की बात नहीं उन तत्वों को बाबूजी बखुबी समझा देते थे। कुछ देर तक मैं उनके पैरों के पॉइंट्स दबाते रहा हर बार की तरह उनसे प्रतिक्रिया की उपेक्षा थी मुझे पर उनके मौन रहना मेरा हृदय में क्रन्दन की भावनाओं को जागृत कर रहा था। करीब 15 से 20 मिनिट तक मैं उनको स्पर्श करता रहा उनकी साँस लेने की तकलीफ को देख पॉइंट्स दवाना बंद कर दिया। परिवार के हर एक सदस्य के चेहरे पर उदासीनता और आँखों से आंसुओं की गंगा बह रही थी, सबके मुखसे क्षमा याचना के सुर गूंज रहे थे और बाबूजी आशीर्वाद की धारा बहा कर अनंत यात्रा के लिए चल बसे।