ये तो होना ही था

यह तो होना ही था,
कितने दिन छुपोगे
भाग कर भी कहाँ जाओगे
प्रकृति के प्रकोप से
आधुनिक विज्ञान का
लाचार, बेबस, उदासीनता को
महसूस करना ही था
यह तो एक दिन होना ही था….।।

यह तो होना ही था,
तुम्हारे बुरे कर्मों का
पिछले जन्मों का नही
बीते हुए कल का,
अर्थ के पीछे निर्रथकता का,
मानव होकर मानवता से अंजान
विज्ञान के अहंकार से स्वयं को महान,
आज उसी विज्ञान से
विनाश का तांडव देखना ही था,
यह तो एक दिन होना ही था..।।

यह तो होना ही था,
तुमने प्रकृति से सबकुछ लिया
ले ले कर स्वार्थी प्रमाण दिया,
तुमने जो दिया
प्रकृति को लौटाना हीं था
यह तो एक दिन होना था….।।

यह तो होना ही था,
दर दर से ठोकर खानी ही थी,
डर डर के जी ही रहे थे
अब डर को करीब से देखना ही था,
यह तो एक दिन होना ही था…
यह तो एक दिन होना ही था…।।
~मुकुंद देव

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~दान~

कर दान गुनी को
गुनी गुन जानी को,
गुन का मान रखिए
पूजन कर मुनी को ॥

गुनी गुन दाता है,
मुनी समान आता है,
ना करो मान गुनी की
ज्ञान चला जाता है ॥

~मुकुंद देव

२७/१२/२०२० 09:59PM

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ढलता हुआ सूरज

ढलता हुआ सूरज बहुत जल्दी ढलता है,
उसका सफ़र आपको न मुझे पता है।
कारनामा सुराजका
ढालने के बाद पता चलता है।
ढलता हुआ सूरज……!!

सुबह से सफर शुरू हुआ था
पता नहीँ वो शुबह कौनसा था,
घड़ी घड़ी सबको रोशन किया था,
अँधेरों का अनदेखा साया
उजालों की लोरी सुनाता हैं।
ढलता हुआ सूरज…..!!
~मुकुंद देव
१०/१२/२०१९ १६:३६PM

କିଛି ଅଛି କିଛି ନହିଁ!

ନା ଅର୍ଥ ଅଛି ନା ସ୍ୱାର୍ଥ ଅଛି
ବ୍ୟର୍ଥତା ସଂପର୍କେ ଗହଣା ସାଜିଛି..।।

ନା ଆଶା ଅଛି ନା ଦିଶା ଅଛି
ନିରାଶାରେ ପ୍ରାଣ ଅଟକି ଯାଇଛି…।।

ନା ଉର୍ଜା ଅଛି ନା ରଶ୍ମି ଅଛି
ଅହଂ ଧୂଆଁରେ ସବୁ ଝାପସା ଦିଶୁଛି…।।

ନା ଧର୍ମ ଅଛି ନା କର୍ମ ଅଛି
ନିଜର ମର୍ମକୁ ଦୂରେଇ ଦେଇଛି..।।

ନା ତୁ ଅଛି ନା ମୁଁ ଅଛି
କିନ୍ତୁ, ମୁଁ ତୁ ରେ ସବୁ ଅଟକି ଯାଇଛି…।।

Nov 14th 2019 23:53pm

ମୁକୁନ୍ଦ ଦେବ

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ଏବେବି ପଡୁଛ ମନେ

ଦିନ ବିତି ଗଲା ରାତ୍ରି ଆଗମନେ
ଏବେବି ପଡୁଛ ମାନେ
ତୁମ ସଂଗେ ବିତା ସମୟକୁ ମୁଁ
ଦେଖୁଅଛି ଦିବା ସ୍ୱପ୍ନେ…..।।

ପଲକ ପଡୁନି ଝଲକ ତୁମେ
ପୁଲକିତ ମର୍ମେ ମର୍ମେ
ପ୍ରୀତି ନୟନରେ ପ୍ରେମର ଇଙ୍ଗିତ
ଦୃଶ୍ୟମାନ କୋଣେ କୋଣେ….।।

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समय

समय समय से बह
रहा है,
पर, आपके साथ बीता समय
ठहर गया है….।
न जाने किस डोर में बंधे हेैं
जो नहीं हैं वह दोहरा रहा हैं….।
समय समय से……!!

समय हैं पर मेैं नहीं हूँ
समय से दूर और कहीं हूँ…..।
वह समय भी समय ही था
जो अब भी मुझमें गुज़र रहा हैं…..।
समय समय……!!

१६/०९/२०१९
~मुकुंद देव

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सुन फिर सुनना

सुन फिर सुनना
ये हे जिंदिगी, नही है खिलौना
जो मैंने देखा
और सुना भी
वो नही है जमाना।।

सुन फिर……

किसने पैदा किया है
कैसे सब हुआ है
अनसुलझी गुट्टी है
इसमें न उलझना
सुन फिर…।।

१५/१०/२०१९
मुकुंद देव

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कौन कहता है ?

कौन कहता है ?
वह मुझमें बसे हैं
इसलिए सब मुझपर हँसे है…।।

कौन कहता है ?
मेरे लिए वह कभी
बोहत रोये है,
और मेरे लिए
ना जगे ना सोये हैं…।।

कौन कहता है ?
मेैं उनमें और वह मुझेमें हैं
उनको मुझसे अटूट प्रेम हैं,
वह मेरे लिए जिए हैं
मेरी याद में पल पल मरे हैं,
यह कौन कहता है ?

किसी ने ठीक कहा है !
न वहाँ काया न कोई छाया हैं
हम सब किसी माया में डूबे हैं…।
न वह मुझमें न मेैं उनमें
पर किसीना किसी धुन में रमे है…।।
यह भी कौन कहता है ?

~मुकुंद देव (०८:४५ pm २८/०८/२०१९)

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ଅନନ୍ତ ସ୍ୱର

ଘାତ ପ୍ରତିଘାତ ଆଘାତ କୁ ସହି
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର ଅନନ୍ତ ରୁ ବହି,
ସ୍ଥିର ଆବରଣେ ଅସ୍ଥିର ସ୍ୱର ଏ
ଗତି ତାର ଧୀର ବହେ ରହି ରହି।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର……….।।

ସମ୍ବାଦ ମୋ ସଂଗେ ବିବାଦ କରଇ
ଅସ୍ଥିର ଲହରୀ ମନେ ମୋ ଖେଳାଇ,
ସ୍ଥିରତା ଆଜି ମୋ ମନର କଳ୍ପନା
ନାଦ ନିରନ୍ତତା ଖୋଜି ପାଉନାହିଁ।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର……… ।।

ଖୋଜି ଖୋଜି କେବେ ହଜି ଯାଉଅଛି
ନିଜ ମଧ୍ୟେ ନିଜେ ମଜ୍ଜି ଯାଉଅଛି,
ଅନନ୍ତ ନାଦର ଅନାଦି ସ୍ୱର ରେ
ଅନ୍ତର ଆତ୍ମା ମୋ ଭିଜି ଯାଉଅଛି।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର……..।।

କେବେ ଜ୍ୟୋତି ହୋଇ ମତି ହରାଉଛି
ଘନ ଅନ୍ଧାରରେ ଆଲୁଅ ସାଜିଛି,
ରଙ୍ଗ,ରୂପ,ଗନ୍ଧ ନଥାଇ କିଛି ବି
ଐଶର୍ୟ ଭାବେ ଯାଉଅଛି ଗାଇ।
ଆସିଛି ଏ ସ୍ୱର………।।

୨୪/୦୮/୨୦୧୯

ମୁକୁନ୍ଦ ଦେବ

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କାଳ

କାଳର ରୂପ ଯେ ବିଶାଳ
କାଳ ନହିଲେ ସେ ଅକାଳ,
କାଳର କଳାରେ କଳାୟିତ ଯିଏ,
କାଳ ତା ପାଈଁ ସକାଳ।

କାଳ ପରି ମନ ଚଞ୍ଚଳ

ଦୁହିଁଙ୍କର ଗତି ପ୍ରବଳ

କାଳ ସଂଗେ ମନ ତାଳ ମେଳ ଥିଲେ

ଜୀବନ ହୋଇବ ନିଶ୍ଚଳ।

2:46PM 27/05/2019