Padma Shri Gundecha Brothers:
“विद्या” के अकूत भंडार – वेद और उपनिषद
हमारे “विद्या”लयों और विश्व”विद्या”लयों के पठन पाठन का हिस्सा क्यूं नहीं बन पाए?
क्यूंकि हम कभी भी एक “स्व”स्थ नहीं, बल्कि एक परस्त भारत चाहते थे। उन पर विचार कीजिये, जिन्होंने ये योजना बनाई थी।
एक अध्ययन by Mukund Dev
(Disciple of padmashri Gundecha Brothers)
Dhrupad Vocalist, Composer, Lyricist, poet & Writer.
आज भारत की शिक्षा प्रणाली को गंभीर परीक्षण की आवश्यकता है। Transformation is a natural process but the educational transformation of india did not happen naturally. ब्रिटिशों ने अपने व्यवसायिक विकाश का अभिवृद्धि करने के लिये व्यवसायिक शिक्षा व्यवस्था का प्रचलन किया। थॉमस बाबिंगटन मैकॉले ने भारत में पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा पद्धति को खत्म कर के व्यावसायिक शिक्षा कि शुरूवात किया था। ब्रिटिशों के वजह से शिक्षा अब सबसे बड़ी बिजनेस है, और हर कोई अधिक मात्रा के साथ शिक्षा के उत्पाद खरीदना चाहता है। जिसने शिक्षा के लिये ज्यादा खर्च किया उनको वो उच्चशक्षित का दरजा भी देते है, जिसके पास सिर्फ information के अलवा और कुछ नहीं रहता है l मेरे विचार से उनको Informer कहना ही उचित होगा। Today we have Robert making education not man making. बौद्धिकता (intellectuality or, intellectual understanding) वेद उपनिषद अध्ययन के बिना कभी जागृत नहीं हो सकता he।
आज भारतवर्ष या विश्वभर में मानवता के संपूर्णता का प्रतीक जितने भी असली बुद्धिजीवी है वो जरूर कहीं ना कहीं संगीत, कला,अध्यात्म या वेदो उपनिषद से घनिष्ठता के साथ जुड़े हीं होंगे क्यूंकि स्व-आत्म के साथ तदात्म्य स्थापन करने का ये जरिया है। जैसे आप महानुभव सत्गुरू ( Padmashri Gundecha Brothers) हमारे मार्गदर्शक है, जिन्होने गुरुकुल शिक्षा पद्धति को आजतक जीवित रखे हैं, और हम सौभाग्यशाली है की उस पद्धति के एक हिस्सा बने, जिसके लिये हम आपके जनम जनम तक सेवानुगत रहेंगे ।
अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के कारण आज हम मानवता के तलाश में है। आज के व्यवसायिक शिक्षा अमानवीयता की परिप्रकाश है। जबतक ये व्यवस्था पुंजीपतीयों के स्व-व्यवसायिक मुल्यवोध के विकाश में है तबतक मानवता को हम ढुडते ढुडते अस्वस्थ हीं रहेंगे। शिक्षा व्यवस्था के विकाश के लिये भारत जबतक स्व-स्थ नहीं तबतक हम भी स्वस्थ नहीं रह सकते।
पुराने गुरुकुल पाठ्यक्रम में सारे विद्याएं आजाते थे जो आजके पाठ्यक्रम से कही गुना बेहतर था। हमारे दुर्भाग्य है कि हम इन विषयों के अध्ध्यन से बंचित हुए। कृपया एक दृष्टि दीजिए।
1. Religion: ऋग्वेद, सामवेद, मंत्र भगा, यजुर्वेद, शुक्ला यजूर छंदस्य आर्किका (बहुत दुर्लभ), वजसनानी संहिता।
2. Vedanta: आत्म बोध, सरिरक, पंच दशी
3. Philosophy: भारत के साथ संख्य तातव कौमुडी, पतंजलि, सूत्र ब्रिति सूत्र, सांख्य प्रवण भवन, वेदांत, वेदांतसर, वैश्येशिका, सिद्धांत मिमांसा, सूत्र, अर्थशास्त्र सूत्र के साथ मुक्तिवली सूत्र के साथ सूत्र एक टिप्पणी
4. Poetry, Drama and religious history: रघु वान, महाभारत, मेघ दुत, वेनिशनहर, मग, शकुंतला, किरत अर्जुन, नाइशाधा चरित, रामायण, मृखाकाटिका, श्री पाद भागवत, कुमार सामभवम्
5. Grammar: सरस्वत, मनोराम, चंद्रिका, भाषा, लागु कौमुडी, पानिन्या व्याकरन, कौमुडी, सिद्धंत कौमुड़ी, शेकर, प्रकृति प्रकास
6. Lexicology: अमर कोष, मालिनी कोष, हलायुध
7. Rhetoric: कविता दीपिक, कविता प्रकाश, साहित्य दरान, दशू रूप, कुवलेनुंड
8. Mathematic,Astronomy, Astrology: सिद्बंत शिरोमणि, नील कंथी, महुर्ता चिंतमनी, ब्रीत जाटक, शिघरा बोध, परसरीय, गर्भ लगान
9. Medical Science: शाम राज, निघांत, सुसुता, शारंग धर, चरका, भाषा पारिचेड, माधव निदान, वाघभाट
10. Logic: न्याया सूत्र वृत्ति, गाडा धारी, व्याट्टपट्टिव, तर्कलंकर, तर्क संगर, करी कवली
11.Low: मनु स्मृति, परसार स्मृति, यज्ञ वाल्क, गौतम, मितक्षार
12. Prosody: श्रुत बोध, वृत्ता रत्नाकर
13. Prose literature: हितोपदेसा, वासवद्त्त्ता, दास कुमार चरिता
14.Chemistry and Metallurgy: रसेंद्र मंगला, रसथनाथक, करशपुता, लोहास्त्र, काकाचंडीश्वरथथरा, रसहरुदाय थंथरा, रासेंद्र चूडमनी, रसप्रकाश सुधाकर, रससरकणारा, असहरुदाया, रसचंतमनी, रसेंद्र चिंतमनी, रसमंजारी, भावप्रकाश, रसकौमुदी, वेशेशिका दरसन यौगिकों और तत्वों की संरचना देता है बुनियादी सिद्धांत
15. Weapon making: धनुर्वेद
16. संगीत कला: Gandharv veda,सामवेद, ।
17.वनस्पति विज्ञान: वृक्ष्यर्वेद, ब्रुथ संहिता, सरगधारा के वृक्ष्यर्वेद, परसार के वृक्ष्यर्वेद
मेरे ख्याल से इन सभी विषय वस्तु के अलावा और भी बहुत सारे विषय गुरुकुल के शिक्षा पद्धति में रही होगी। तब शिक्षा में जाती भेद था ब्राह्मण,वैश्य, क्षेत्रीय शिक्षा के भागीदार रहते थे शूद्र वंचित था पर परिवर्तनशील
समाज में वो अबतक जरूर परिवर्तित हो जाता निसंदेह।
व्यवसायिक शिक्षा के कारण आज देश में हर कोई नौकरी या व्यवसाय करना चाहता है। कृषि के उत्पादन के लिये कोई भी आग्रहित नहीं हैं । खाना सब चाहते हैं पर कोई उगाना नहीं चाहता हैं। 2011 रिपर्ट के अनुसार स्वाधीनता के पूर्व कृषकता 80% थी। जो 2011 तक घट कर 31.55% प्रतिशत हो गया है । ये गहरी चिंता का विषय है ।
एक कलाकार संगीत साधक शिक्षार्थी होने के नाते में ये कह सकता हुँ की संगीत के क्षेत्र में व्यवसायिक शिक्षा के कारण महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों से डिग्री के सार्टीफिकेट तो मिल जाता है पर एक सुदक्ष संगीतज्ञ नहीं। एक उच्च श्रेणीय कलाकार सुसंगीतज्ञ होने के लिये सत्गुरु के शरण में रहकर गुरुशिष्य के उधारभूत पद्धति का अनुकरण या अनुशरण करना हीं पड़ेगा। मैं खुद हीं संगीत महाविद्यालय और भारत के सुप्रसिद्ध मुम्बाई विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त हुँ जाहा मैने अपने जीवन का 7 साल बिताया। पर आज आपके जैसे महान गुरुके शरण में रहकर गलत प्राप्त ज्ञानों को सफाई कर रहा हुं ।
आज के पाठ्यक्रम में human resources एक compulsory subject नहीं और इसमें जो किताबें है वो वेद उपनिषद के अणु मात्र भी नहीं है। ये पड़ कर humanity’s का स्लोगन ही दे सकते है वाकी कुछ नहीं। ऐैसे शिक्षा से जुड़े हजारों समस्यों से हम अज्ञात है और परस्थ भी। जिसके बजह से हिंसा, अराजनैतिकता, अमानवियता वड़ते हीं जा रहें है। Sorry कुछ ज्यादा कहा तो काफी सालों से मै इसके वारे में सोच रहा हुं क्यों के मेरी शिक्षा सरकारी विद्यालय , महा विद्यालय, विश्वविद्यालय में हुआ है जाहाँ पर्याप्त शिक्षकों का अभाव था, दूसरे और मेरे कुछ दोस्त private स्कुल कलेज में पड़ते हुए उनके स्कूल कलेज के बाते बोलते थे। तभी मुझे student organization के कुछ लोग मिले और मुझे शिक्षा से जुड़े समस्याओं से अवगत कराये ।