
न तेरा है न मेरा है
फिर भी ख़रीददारी चल रही है,
न तेरा है न मेरा है
फिर भी धोखादारी चल रही है,
न तेरा है न मेरा है
फिर भी मारा-मारी चल रही है…
बस चल रहा है,
जीवन का यह निर्बाह
न है संवाद
न है कोई उत्साह,
न सत्य से पहचान
न कोई खोज,
घट रही वही कहानी
हर रोज…
बस चल रहा है,
जीवन का एक झूठा नाटक,
किसी के झुठेपन से
खुल और बंद हो रहा
जीवन का अनखुला फाटक…
बस चल रहा है,
किसीने कुछ कहा
बिन सुने उसको सुना
बिन देखे उसको देखा,
खुद को उनमें समाया
और खुद को खुद से ही रोका….
बस चल रहा है,
नित्य कर्म
जो अनित्य से जुड़ा है,
कितनों की ख़ुशी के लिए
खुद-को कहीं दूर छोड़ा है….
बस चल रहा है
जीवन की नॉका मैं
शारीर सबार है,
किनारे से निकले थे
किनारे की तलाश है,
बस चल रहा है…
सोचा था
सागर बहुत छोटा है,
वही तक फैला है
जहाँ बादल झुका है,
जितने भी करीब आऊ
वो बैसे दीखता है,
मेरे नज़र के साथ
ये कैसी धोखा है,
बस चल रहा है….
क्या पता यह शरीर
कब मुझसे नाता तोड़ दे,
बस तोड़ने से पहले
अपने आप से नाता जोड़ दे,
ढूंढ लूँ अपने आपको आप में
फिर सभी से नाता तोड़ दे
फिर सभी से….
Very nicely written. Inspirational.
This is the real truth of life to get eternity. And to see yourself within you.
Pranaam.
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Very nice sir
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