उस अनन्त यात्रा के आखरी वक़्त पर मुझे उनके चरण सेवा का अवसर मिला। उनके पद स्पर्श करते ही उनकी ऊर्जा का किंचित आभास हुआ और उनकी आँखें जब मुझ पर पड़ी सर हिलाते हुए कुछ इशारा कर रहें थे, शायद हर बार की तरह जीवन दर्शन के तत्व समझाना चाहते थे। जिन तत्वों के कारण मुझमें परिवर्तन का एक सुधारा बह रहा हैं। जिन तत्वों को समझना और समझाना सबके बस की बात नहीं उन तत्वों को बाबूजी बखुबी समझा देते थे। कुछ देर तक मैं उनके पैरों के पॉइंट्स दबाते रहा हर बार की तरह उनसे प्रतिक्रिया की उपेक्षा थी मुझे पर उनके मौन रहना मेरा हृदय में क्रन्दन की भावनाओं को जागृत कर रहा था। करीब 15 से 20 मिनिट तक मैं उनको स्पर्श करता रहा उनकी साँस लेने की तकलीफ को देख पॉइंट्स दवाना बंद कर दिया। परिवार के हर एक सदस्य के चेहरे पर उदासीनता और आँखों से आंसुओं की गंगा बह रही थी, सबके मुखसे क्षमा याचना के सुर गूंज रहे थे और बाबूजी आशीर्वाद की धारा बहा कर अनंत यात्रा के लिए चल बसे।
तू तू में में !
तू मैं मैं में
न तू है न मैं,
जो न है वो है
जो है सो है…।।
१४/०९/२०१९
मुकुंद देव
स्वर में जब समायो
बेजान में जान आयो
सुरों से जब रमायो
आलाप न तान
एक में सब समायो।।
इच्छा अनिच्छा
कछु न आई,
अहम् नाद
स्वहम् गायो,
अनंत नादे
निरन्त आयो।।
~मुकुंद देव २२/०८/२०१९
राग अद्भुत कल्याण
गणपति भूपति मूषक बाहन
एक दंत सब गुण कानन….।
देवा देव देवेन्द्राशिक
पार्वती सुमुख वरद बिनायक…।।
मुकुंद देव
ବ୍ୟଙ୍ଗ କଟାକ୍ଷ
ଯେବେ ନିଜେ ଚୌକିଦାର ହୋଇବେ
ଚୋରକୁ, ପକେଇ ଉଠେଇ ଥୋଇବେ!!
ଯଦି ଅନ୍ୟକୁ ବାଟ ଚାହିଁବେ
ଅନ୍ୟେ, ସବୁକିଛି ତୁମ ଲୁଟିବେ!!
ଚୋର ଆଜି ନାହିଁ ଗୋଚରେ
ରହିଛି ଆମରି ଭିତରେ,
ଧରିବା ଜାଲତ ପଡ଼ିଛି
କିନ୍ତୁ, ଧରା ପଡ଼ିବନି ହାତରେ!!
ନିତି ଅନିତି ର ନିକିତୀ
ଚୋର ହାତେ ଯିଏ ଦିଅନ୍ତି,
ଅନ୍ୟ କେହି ନୁହେଁ
ଆମେ ପରା ସିଏ,
ନିଜକୁ ନିଜେ ଯେ ବିକନ୍ତି!!
~◆~
ମୁକୁନ୍ଦ ଦେବ ସାହୁ
୨୩:୧୨PM
୦୯-୦୩-୨୦୧୯
ମୋ ଚିନ୍ତନରେ…
ମୋ ଚିନ୍ତନରେ ତୁମରି ଭାବନା
ଅବଂଛିତ ମନେ ସ୍ନେହର କାମନା,
ବାସନା ବାସ୍ନାରେ ପୁଲକିତ ମନା
କଉଁଠି କେମିତି ମନୁ ମୋ ବିନା ।।
ମୋ ଚିନ୍ତନରେ…
କାମନା ରାଜ୍ୟର ଉତ୍-କ୍ଷିପ୍ତ କମିନୀ
ଏକକ ଶଯ୍ୟାରେ ସ୍ବପ୍ନ ସଯ୍ୟାୟିନି
ସ୍ପର୍ଶା-ଲିଙ୍ଗନର ଉଚ୍ଚା ଭିଳାଷିନି,
ଦୃଶ୍ୟର ଅପଥେ ଅଦୃଶ୍ୟର ତଟେ
ମତେ ଛାଡ଼ି ଆଉ ରୁହନା ।।
ମୋ ଚିନ୍ତନରେ…..
ଉତ୍ତେଜିତ ପ୍ରଣେ ଅସଂଖ୍ୟ ପ୍ରଶ୍ନେ
ସ୍ପର୍ଶ କରିବିନି ପାଖକୁ ଯିବିନି
ଏକା ବଂଚିଯିବି କହେ ମନେ ମନେ,
ନିଷ୍ଟୁର ସାଧନେ ଅଦୃଶ୍ୟ ଦର୍ଶନେ
ମୋତେ ବିଚଳିତ କରନା ।।
ମୋ ଚିନ୍ତନରେ…..
ପୁର୍ବ ସ୍ମୃତି ସବୁ ଅଜାଡ଼ି ଦେଖୁଛି
ଉପସ୍ଥିତି ତୁମ ହୃଦ ବିଦାରିଛି,
ମନ ମନୁ ମୋରୋ ତୁମେ ସବୁକିଛି,
ତୁମ ଅମୁଲ୍ୟ ରତନ ଯତ୍ନରେ ବଢୁଛି,
ତା ପାଈଁ ବିଚଳ ହୁଅନା।।
ମୋ ଚିନ୍ତନରେ….
୧୦-୧୦-୨୦୧୮
ମୁକୁନ୍ଦ ଦେବ
बंदिश
स्थाई:
सेज बिछाऊ फूलेवन में
पी के दरस लागी,
पी गयो कबसो ना आयो
दीन रात हूं जागी ।।
अंतरा:
तड़प तड़प जोबन जात है
नैनन में नीर ,नित बहत
रुठो ना मोसो अनुरागी ।।
२२/१०/२०१८
राग गावति
मोरे अवगुण ना धरो गुण के ज्ञानी
मैं अज्ञानी सुरताल कछु न जानि ….।
गुन के मुरत गुरुमुख सूरत
दया करो मोपे तुम हो महाज्ञानी….।।
गुरुकृपा
०५/११/२०१८
~मुकुन्द देव
http://www.mukunddev.com
मैंने देखा
#मैंने_देखा
आज मैने देखा
अंधेरों को जाते हुए
उजालों की स्वागत में
प्रकृति को गाते हुए…।।
मैने देखा
बंद दीवारों से बाहर
निकलते हुए,
उजालों की खुशी
और अंधेरों को रोते हुए…।।
मैने देखा
अंधेरों में डूबे हुए
चारों और से घिरे हुए
जीवन से जो डरे हुए,
प्रकृति के
बोल, उजालों से
उन्हें जगते हुए,
मैंने देखा
मुझे और आपको
प्रकृति जगाते हुए…।।
#मुकुंददेव
१२.०७.२०१८
जीवन धारा
चित्त में जोत जलाओ
अब ना देर होई,
जोत जले मानो
तब ही भोर भई….
तुझमें केबल तू बसा है
और ना दूजा कोई,
मन दर्पण कर ले साफ
सुख-दुख कछु नहीं…..
जीवन धारा बढ़ चला है
राह कोई ना दिखाई,
अपने पथ आपन देखो
संगत कोई नही…..
अमर विष पीइ ना आया
भव धरा में कोई,
मृत्युंजय जप जितना चाहे
मरन निकट होई….
#मुकुन्द_देव #जीवन_धारा